महामहोपाध्याय (= महा + महा + उपाध्याय; म्हणजे महान पुरोहितांमधेही महान) ही भारत सरकारद्वारा दिल्या जाणारी एक सन्मानिय पदवी आहे . स्वातंत्र्यपूर्वकाळात ब्रिटिश सरकार ही पदवी देत असे . त्याआधीही भारतीय राजांनी अनेक विद्वानांना ही पदवी बहाल केली होती. प्राचीन काळी शास्त्राशी संबंधित विषयांवर ग्रंथरचना करणाऱ्या विद्वानांना महामहोपाध्याय ही पदवी दिली जात असे.
काही विद्वान ज्यांना महामहोपाध्यायच्या उपाधीने सुशोभित केल्या गेले-
महामहोपाद्याय सुब्बराय शास्त्री,
महामहोपाद्याय वा.वि. मिराशी,
महामहोपाध्याय वासुदेवशास्त्री अभ्यंकर,
महामहोपाध्याय पांडुरंग वामन काणे,
महामहोपाध्याय डॉ. ब्रह्मानंद देशपांडे,
महामहोपाध्याय सिद्धेश्वरशास्त्री चित्राव
महामहोपाध्याय तर्कतीर्थ लक्ष्मणशास्त्री जोशी,
महामहोपाध्याय दत्तो वामन पोतदार,
महामहोपाध्याय साहित्याचार्य बाळशास्त्री हरदास,
महामहोपाध्याय एन.सी. सत्यनारायण,
महामहोपाध्याय डॉ.आर. सत्यनारायण,
महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज,
महामहोपाध्याय वागीश शास्त्री,
महामहोपाध्याय रामेश्वर झा,
महामहोपाध्याय राम अवतार शर्मा,
महामहोपाध्याय श्रीगंगेशोपाध्याय,
महामहोपाध्याय रायबहादूर गौरीशंकर ओझा,
महामहोपाध्याय रेवप्रसाद द्विवेदी,
महामहोपाध्याय कल्याण दत्त शर्मा,
महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री,
महामहोपाध्याय जयमंत मिश्रा,
महामहोपाध्याय वेदम वेंकटराय शास्त्री,
महामहोपाध्याय विश्वेश्वर नाथ रे
महामहोपाध्याय
या विषयावर तज्ञ बना.