त्रिगुणी का शाब्दिक अर्थ है तीन गुणों वाला, अर्थात जिसमें प्रकृति के तीनो गुण- सत्त्व, रजस् और तम एक साथ उपस्थित हो!
सामान्यतः सत्त्व गुण से तात्पर्य श्रेष्ठ गुणों से है जिनमें सत्य, पवित्रता, दया, ज्ञान शामिल हैं|
रज गुण में राजसी प्रवृत्ति की प्रधानता होती है इसमें मनुष्य रुप, सन्मान और अहंकार आदि भावों के अधीन रहता है|
तम गुण क्रोध, असत्य, मद, नकारात्मक ऊर्जा का भंडार माना जाता है
सामान्यतः मनुष्य में किसी एक गुण की प्रधानता होती है, किंतु जब मनुष्य में इन तीनों गुणों का एक साथ समान रूप से उपस्थित होने पर वह अद्वितीय गुणों का स्वामी माना जाता है
इसी स्थिति को त्रिगुणी कहा जाता हैं|
लाखों में से किसी एक मनुष्य में यह त्रिगुण एक साथ उपस्थित होते हैं, इसलिए यह असंभव ही प्रतीत होता है
त्रिगुण
याबद्दल तुम्हाला सर्वकाही माहित आहे का?